गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की सुदामा योजना बनी आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का सहारा, एक करोड़ से अधिक का शिक्षा कोष तैयार

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Guru Ghasidas Central University's 'Sudama Yojana' becomes a lifeline

बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की सुदामा योजना आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए केवल सहायता योजना नहीं, उच्च शिक्षा में समान अवसर का सशक्त मॉडल बनकर उभरी है।

15 अगस्त 2024 से शुरू इस पहल के शिक्षा कोष में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है। पूर्व छात्र, संकाय, कर्मचारी और समाज के सहयोग से संचालित इस योजना के माध्यम से अब तक देश के अलग अलग राज्यों के 171 विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मिल चुकी है, जबकि इस सत्र में यह संख्या 200 के पार पहुंचने की संभावना है।

सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता से प्रेरित इस योजना की परिकल्पना विश्वविद्यालय के कुलपति की दूरदर्शी सोच से हुई है। इस योजना की परिकल्पना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के मन में जनवरी 2024 में आई।

कैंपस की एक कैंटीन में प्राध्यापकों के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने कुछ विद्यार्थियों को फीस जमा करने में आर्थिक परेशानी बताते सुना। तभी उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए अलग शिक्षा कोष बनाने का विचार रखा, ताकि लंबी कागजी प्रक्रिया के बजाय आर्थिक स्थिति का आकलन कर तत्काल सहायता दी जा सके।

इसके बाद प्राध्यापकों की समिति गठित की गई और योजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया गया। योजना के तहत ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क, पुस्तकें, अध्ययन सामग्री, ई-संसाधन, जीवन-कौशल प्रशिक्षण, परामर्श सेवाएं तथा आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

इसका लाभ केवल गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने या अध्ययनरत विद्यार्थियों को दिया जाता है। विश्वविद्यालय लगातार प्राध्यापकों, पूर्व छात्रों, कर्मचारियों और समाजसेवियों को शिक्षा कोष में योगदान के लिए प्रेरित कर रहा है।

छात्र कैसे ले सकते हैं योजना का लाभ?

कोष का संचालन कुलसचिव, वित्त अधिकारी और अधिष्ठाता छात्र कल्याण के संयुक्त खाते से किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

जरूरतमंद विद्यार्थी निर्धारित आवेदन और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं। पात्रता की जांच के बाद सहायता सीधे संबंधित शैक्षणिक मदों में उपलब्ध कराई जाती है।

योजना का प्रभाव केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पढ़ाई छोड़ने की आशंका घटी है, विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और परिसर में सहयोग व दान की संस्कृति भी मजबूत हुई है।

Chhattisgarh (12)

ऐसे जुड़ सकते हैं दानदाता 

सुदामा योजना को सामाजिक सहभागिता का अभियान बनाया है। पूर्व छात्र, संकाय सदस्य, कर्मचारी, विद्यार्थी और अन्य इच्छुक दानदाता स्वेच्छा से शिक्षा कोष में योगदान कर सकते हैं।

जमा राशि कार्पस फंड में सुरक्षित रखी जाती है और प्रत्येक दानदाता को आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर छूट प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था के तहत संचालित होती है।

आंकड़ों में सुदामा योजना

  • सत्र 2024-25 में 66 लाभार्थी, जिनमें 47 छात्र और 19 छात्राएं 
  • सत्र 2025-26 में 105 लाभार्थी, जिनमें 67 छात्र और 38 छात्राएं 

सुदामा योजना ने बदली छात्रों की राह

बिहार गया निवासी एवं विधि संकाय के छात्र आनंद कुमार बताते हैं कि फीस जमा करने पांच हजार रुपये की जरूरत थी। सुदामा योजना से तत्काल 5,050 रुपये की सहायता मिली।

सबसे अच्छी बात यह रही कि इस राशि को लौटाने का कोई दबाव नहीं है। शिक्षा संकाय के दृष्टिबाधित छात्र लक्ष्मण केंवट को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

चिरमिरी निवासी एवं सीएसआईटी (गणित), पंचम सेमेस्टर की छात्रा अनन्या गुप्ता ने कहा कि मेरे पिता तत्काल फीस की व्यवस्था नहीं कर पाए थे। मैंने इस योजना के तहत आवेदन किया और बहुत कम समय में 10 हजार रुपये की सहायता मिल गई। इससे समय पर फीस जमा हो गई और पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई।

युवाओं में आत्मविश्वास जगाना लक्ष्य 

सुदामा योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बच्चों में यह विश्वास जगाना है कि प्रतिभा कभी आर्थिक अभाव के कारण पीछे न रहे। यह शिक्षा कोष लगातार मजबूत हो रहा है। हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय का कोई भी जरूरतमंद विद्यार्थी संसाधनों के अभाव में अपनी पढ़ाई न छोड़े और सम्मानपूर्वक उच्च शिक्षा पूरी करे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के समानता और समावेशी शिक्षा के उद्देश्य को भी मजबूती देती है।

(प्रो.आलोक कुमार चक्रवाल, कुलपति, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय)